
Wednesday, December 30, 2009
Sunday, December 6, 2009
जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
अंदर बाहर वश में जिसके,
इन्द्रियाँ भी हैं जीती जिसने,
भोगों को त्याग दिया है जिसने,
आशा रहित ऐसा व्यक्ति,
शरीर निर्वाह कर्म करते भी,
नहीं पाप का भागी जगमें.
आगे -
यदृच्छालाभसंतुष्टो द्वंद्वातीतो विमत्सरः.
समः सिद्धावसिद्धौ च कृतवापि न निबध्यते..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 22
Friday, November 27, 2009
Saturday, November 21, 2009
Sunday, November 15, 2009
Friday, November 13, 2009
जय श्री कृष्ण
Saturday, November 7, 2009
Friday, October 30, 2009
Friday, October 23, 2009
जय श्री कृष्ण
Saturday, October 17, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र,
ये सब समूह सब प्रकार हि मैं रचता,
यूँ सब प्रकार सृष्टि, रचनादि कर्म का कर्ता भी,
मैं अविनाशी परमात्मा रहता अकर्ता. अ.4 श्ल.13
आगे -
न मां कर्मानि लिंपन्ति न मे कर्मफले स्पृहा.
इति मां यो$भिजानाति कर्मभीर्न स बध्यते..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 14
Saturday, October 10, 2009
Friday, October 2, 2009
Monday, September 28, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -
पहले भी जो राग, भय, क्रोध से मुक्त हो गए,
और मुझमें प्रेमपूर्वक स्थित हो गए,
ऐसे मेरे आश्रित और उपर ज्ञान तप से शुद्ध हुए,
सब लोग मेरे स्वरूप को प्राप्त हो गए. अ. 4 श्ल. 10
आगे -
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम.
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 11
Sunday, September 20, 2009
Saturday, September 12, 2009
Friday, September 4, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्ण
सुन ले मेरे भारत ! जब जब भी इस धरती पर,
धर्म की हानि और अधर्म की वृध्दि होती है,
तब तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ इस पृथ्वी पर,
अर्थात साकार रूप में लोगों के सम्मुख मेरी उत्पत्ति होती है. अ. 4 श्ल. 7
आगे -
परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम्.
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 8
Friday, August 28, 2009
Saturday, August 22, 2009
जय श्री कृष्ण
Saturday, August 15, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -
अर्जुन बोले - कैसे मान लूं,
तुम अभी जन्में हाल में,
सूर्य का जन्म पुराना,
अर्थात कल्प के आदि से,
कैसे मानूं की तुमने कहा,
यह योग सूर्य से? अ.4 श्ल. 4
आगे -
श्रीभगवानुवाच
बहुनि मे व्यतीतानी जन्मानि तव चार्जुन.
तान्यहम वेद सर्वाणी न त्वम् वेत्थ परन्तप..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 5
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 5
Saturday, August 8, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
इस प्रकार हे परन्तप ! परम्परा से,
प्राप्त इस योग को राजर्षियोँ ने जाना,
किन्तु इसके उपरांत बहुत काल से,
ये योग पृथ्वी लोक से रहा लुप्तप्राय व अनजाना. अ. 4 श्ल. 2
आगे -
स एवायं मया तेअद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः.
भक्तोअसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 3
Tuesday, August 4, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
श्रीभगवान बोले सुन मैने पूर्व काल में,
इस अविनाशी योग को कहा था सूर्य से,
सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से,
वैवस्वत मनु ने कहा तब अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से.अ. 4 श्ल. 1
आगे -
एवं परंपराप्राप्तमिमं राजर्षायो विदुः.
स कालेनेह महता योगो नष्टः परंतप..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 2
Saturday, August 1, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
बुद्धि से पर, सूक्ष्म, बलवान,
व अत्यंत श्रेष्ठ आत्मा को पहचान,
बुद्धि के द्वारा, मन वशमें करके,
हे महाबाहो ! जाओ जीत लो काम,
इस दुर्जय शत्रु को कर दो तमाम.अ.3 श्ल. 43
आगे -
श्रीभगवानुवाच
इमम् विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् .
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्श्वाकवेब्रवीत..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 1
Friday, July 31, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्ण
स्थूल शरीर से परे ये इन्द्रियाँ मान,
अर्थात श्रेष्ठ, बलवान, व सूक्ष्म ये जान,
ऐसे ही इंद्रियों से परे ये मन है मान,
मन से परे ये बुद्धि तू जान,
और बुद्धि से भी जो अतयंत परे है,
वो है ये सर्व व्यापी आत्मा ये जान. अ. 3 श्ल. 42
आगे -
एवं बुद्धेः परम् बुद्ध्वा सनस्तभयात्मानमात्मना.
जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दूरासदम्..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 43
Thursday, July 30, 2009
Wednesday, July 29, 2009
Sunday, July 26, 2009
Saturday, July 25, 2009
Friday, July 24, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
श्री भगवान बोले,
रजोगुण से उत्पन्न काम ही क्रोध है,
बहुत खाने व भोगों से न तृप्त होने वाला है,
बड़ा पापी, इस विषय में यही तेरा शत्रु है,
यही तो पाप करने और करवाने वाला है. अ. 3 श्ल. 37
आगे -
धूमेनाव्रियते वन्हिर्यथादर्शो मलेन च.
यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम्..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 38
Thursday, July 23, 2009
Wednesday, July 22, 2009
Tuesday, July 21, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -
इंद्रिय-इन्द्रियके विषय में,
राग द्वेष छिपे स्थित रहें,
मनुष्य को चाहिए,
इनके वश में न बहें,
क्योंकि यही उसके मार्ग में,
महान शत्रु बने रहें. अ. 3 श्ल. 34
आगे -
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात.
स्वधर्मे निधनम श्रेयः परधर्मो भयावहः..
श्रीमदभगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 35
Monday, July 20, 2009
Sunday, July 19, 2009
Saturday, July 18, 2009
Friday, July 17, 2009
Thursday, July 16, 2009
Wednesday, July 15, 2009
Tuesday, July 14, 2009
Monday, July 13, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्ण हिन्दी अनुवाद -
परमात्मा में स्थित ज्ञानी जन,
शास्त्रविहित कर्मों में आसक्ति वाले,
अज्ञानी जनों की बुद्धि में सुन,
भ्रम या अश्रद्धा न उत्पन्न करे,
स्वयं शास्त्रविहित कर्म करे,
व उनसे भी वैसे हो प्रयत्न करे. आ. 3 श्ल. 26
आगे -
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्मानि सर्वशः.
अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 27
Sunday, July 12, 2009
Saturday, July 11, 2009
Friday, July 10, 2009
Thursday, July 9, 2009
Wednesday, July 8, 2009
Tuesday, July 7, 2009
Monday, July 6, 2009
Sunday, July 5, 2009
Saturday, July 4, 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)





































