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जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्णहे अर्जुन ! जो मुझे जैसा भजता है,वैसा ही मैं उसे भजता हूँ,क्योंकि सभी मनुष्य, सब प्रकार मेरा ही अनुसरण करते हैं.यही मैं भी करता हूँ. अ. 4 श्ल. 11
आगे - कांक्षन्तः कर्मणाः सिद्धिं यजन्तः इह देवताः.क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 12
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