Friday, October 2, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हे अर्जुन ! जो मुझे जैसा भजता है,
वैसा ही मैं उसे भजता हूँ,
क्योंकि सभी मनुष्य, सब प्रकार मेरा ही अनुसरण करते हैं.
यही मैं भी करता हूँ. अ. 4 श्ल. 11


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कांक्षन्तः कर्मणाः सिद्धिं यजन्तः इह देवताः.
क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 12

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