ॐजय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र,
ये सब समूह सब प्रकार हि मैं रचता,
यूँ सब प्रकार सृष्टि, रचनादि कर्म का कर्ता भी,
मैं अविनाशी परमात्मा रहता अकर्ता. अ.4 श्ल.13
आगे -
न मां कर्मानि लिंपन्ति न मे कर्मफले स्पृहा.
इति मां यो$भिजानाति कर्मभीर्न स बध्यते..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 14

No comments:
Post a Comment