Friday, July 31, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


स्थूल शरीर से परे ये इन्द्रियाँ मान,
अर्थात श्रेष्ठ, बलवान, व सूक्ष्म ये जान,
ऐसे ही इंद्रियों से परे ये मन है मान,
मन से परे ये बुद्धि तू जान,
और बुद्धि से भी जो अतयंत परे है,
वो है ये सर्व व्यापी आत्मा ये जान. अ. 3 श्ल. 42


आगे -


एवं बुद्धेः परम् बुद्ध्वा सनस्तभयात्मानमात्मना.
जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दूरासदम्..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 43


Thursday, July 30, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


इसलिए हे अर्जुन ! वश में कर ले इन्द्रियाँ,
न रख कोई मलाल,
ज्ञान व विज्ञान के महान नाशक काम को,
बलपूर्वक मार डाल. अ. 3. श्ल. 41


आगे -


इन्द्रियाँनि पराण्याहूरिंद्र्येभयः परम् मनः.
मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 42

Wednesday, July 29, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि रहे सदा काम के वास,
मोहित करे इंसान को ढके ज्ञान की आस. आ. 3 श्ल.40


आगे -


तस्मात्त्वमिन्द्रियान्यादौ नियम्य भरतर्षभ.
पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 41

Sunday, July 26, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


दुनियाँ में इस काम की,
कभी न बुझती प्यास,
ज्ञानी के नित्य वैरी से,
छिपी ज्ञान की आस. अ.3 श्ल. 39


आगे -


इन्द्रियानि मनो बुद्धीरसयाधिष्ठानामुच्यते.
एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 40

Saturday, July 25, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


जिस तरह धुएँ से अग्नि,
मैल से दर्पण ढके जान,
ज़ेर से गर्भ वहीं,
काम से ढके ज्ञान.अ.3 श्ल. 38


आगे -


आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा.
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणालेन च..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 39

Friday, July 24, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


श्री भगवान बोले,
रजोगुण से उत्पन्न काम ही क्रोध है,
बहुत खाने व भोगों से न तृप्त होने वाला है,
बड़ा पापी, इस विषय में यही तेरा शत्रु है,
यही तो पाप करने और करवाने वाला है. अ. 3 श्ल. 37


आगे -


धूमेनाव्रियते वन्हिर्यथादर्शो मलेन च.
यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम्..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 38

Thursday, July 23, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


अर्जुन बोले - हे कृष्ण किस तरह,
ये मनुष्य अनचाहे चलता है?
बलपूर्वक लगाए की तरह,
किससे प्रेरित हो पाप करता है?अ. 3 श्ल. 36


आगे -


श्रीभगवानुवाच
काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः.
महाशनो महापाप्मा विद्धयेनमिह वैरिणम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 37

Wednesday, July 22, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


अच्छी प्रकार आचरण लाए,
परधर्म से स्वधर्म आला है,
अपने निर्गुण धर्म में मरना श्रेयकाए,
दूसरे का उत्तम भी भय वाला है.अ. 3 श्ल. 35


आगे -


अर्जुन उवाच
अथ केन प्रयुक्तोयं पापं चरति पुरुषः.
अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजितः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 36

Tuesday, July 21, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


इंद्रिय-इन्द्रियके विषय में,
राग द्वेष छिपे स्थित रहें,
मनुष्य को चाहिए,
इनके वश में न बहें,
क्योंकि यही उसके मार्ग में,
महान शत्रु बने रहें. अ. 3 श्ल. 34


आगे -


श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात.
स्वधर्मे निधनम श्रेयः परधर्मो भयावहः..


श्रीमदभगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 35

Monday, July 20, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


सब प्राणी करें काम,
प्रकृति के वश होकर,
ज्ञानवान भी करें काम,
स्वप्रकृति के वश होकर,
फिर इसमें सोचो क्या करें,
बरबस जोर लगाकर.अ.3 श्ल. 33


आगे -


इन्द्रियस्येइन्द्रियस्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ,
त्योर्न वशहमागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपन्थिनौ..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 34

Sunday, July 19, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


परन्तु जो मनुष्य मुझमें,
दोष देखते हैं,
मेरे मत अनुसार,
नहीं चलते हैं,
वे मूर्ख सब ज्ञानों में मोहित,
नष्ट हो जाते हैं. अ. 3 श्लो. 32


आगे -


सदृशम् चेष्टते स्वस्याः प्रकृते:ज्ञानवानपि,
प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 33

Saturday, July 18, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


जो भी बिना शक़ किए,
सदा अनुसरण करते आएं,
श्रद्धा पूर्वक मेरे मतानुसार,
वे भी संपूर्ण कर्मों से मुक्त हो जाएँ.अ . 3 श्ल. 31


आगे -


ये त्वेतदभ्यसुयन्तो नानुतिष्ठन्ति मे मतम.
सर्वज्ञान्वीमूडान्स्तान्विद्धि नष्टांचेतसः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 32

Friday, July 17, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


मुझ अंतर्यामी परमात्मा में,
हमेशा ध्यान रखकर,
संपूर्ण कर्मों को मुझमें,
पूर्णतया अर्पण कर,
और आशारहित, ममतारहित व,
संतापरहित हो युद्ध कर. अ. 3 श्ल. 30


आगे -


ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः.
श्रद्धावन्तोनसुयन्तो मुच्यन्ते तेपि कर्मभिः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 31

Thursday, July 16, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


प्रकृति गुणों से मोहित रहने वाले,
गुणों और कर्मों में आसक्त रहें,
उन न समझने वालों को जानने वाले,
ज्ञानीजन विचलित होने न कहेँ. अ. 3 श्ल. 29


आगे -


मयि सर्वाणी कर्मानी सन्न्यस्याध्यात्मचेतसा.
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 30

Wednesday, July 15, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


हे महाबाहो ! गुणविभाग,
कर्मविभाग के ज्ञाता व ज्ञानयोगी,
गुण ही गुणों में बरतें ये जान,
न होवें उनमें आसक्त भागी. अ. 3 श्ल. 28


आगे -


प्रकृतेर्गुंणसम्मूढाः सज्जन्ते गुणकर्मसु,
तानकृत्स्न्नविदो मन्दान्कृत्स्न्नविन्न विचालयेत..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 29

Tuesday, July 14, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


सत्त तो ये जान कि संपूर्ण कार्य प्रकृति के,
गुणों द्वारा पूर्णतया किए जाएँ,
परंतु अहंकार अंतःकरण में जिनके,
अज्ञानीजन मैं कर्ता हूँ यूँ मानते आएं. अ. 3 श्ल. 27


आगे -


तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयो:.
गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 28

Monday, July 13, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


परमात्मा में स्थित ज्ञानी जन,
शास्त्रविहित कर्मों में आसक्ति वाले,
अज्ञानी जनों की बुद्धि में सुन,
भ्रम या अश्रद्धा न उत्पन्न करे,
स्वयं शास्त्रविहित कर्म करे,
व उनसे भी वैसे हो प्रयत्न करे. आ. 3 श्ल. 26


आगे -


प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्मानि सर्वशः.
अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 27


Sunday, July 12, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


हे भारत जैसे कर्म में आसक्त अज्ञानीजन,
कर्म करते रहें,
लोकसंग्रह व आदर के लिए आसक्तिरहित ज्ञानीजन,
कर्म करते रहें.अ. 3 श्ल. 25


आगे -


न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानाम् कर्मसंगिनां,
जोषयेत्सर्वकर्माणी विद्वान्युक्तः समाचरण..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 26

Saturday, July 11, 2009

जय श्री कृष्ण



जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


इसलिए यदि न करूँ कर्म मैं,
सब लोग देख मुझे नष्ट भ्रष्ट हो जाएँ,
अनचाही आबादी बढ़ जाए,
सारा जहाँ नष्ट हो जाए.अ. 3 श्ल. 24


आगे -


सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत,
कुर्याद्विद्वान्स्तथासक्तश्चिकिर्शुर्लोकसन्ग्रहम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 25

Friday, July 10, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


क्यों की यदि मैं न बरतूं ,
सावधानी पूर्वक अपने कर्मों में,
सब तरफ हानि करदूं.
मेरा अनुसरण करें सब जग में.अ.3 श्ल. 23


आगे -


उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम.
सन्करस्य च करता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 24

Thursday, July 9, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


हे पार्थ ! इन तीनों लोकों में,
मुझे कोई कर्म नहीं,
न ही प्राप्ति योग्य अप्राप्य जग में,
तो भी न रहूँ बिना कर्म कहीं.अ. 3 श्ल. 22


आगे -


यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतंद्रितः.
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 23

Wednesday, July 8, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


वे उदा:रण रखते हैं,
श्रेष्ठ लोग देवसम जन,
अन्य अनुसरण करते हैं,
वे जो भी सिद्ध करते हैं,
समस्त जन उनका,
पालन करते हैं. अ.3 श्ल. 21


आगे -


न में पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किंचन.
नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव स कर्मणि..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 22


Tuesday, July 7, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


जनकादि ज्ञानीजन राजाओं ने भी,
आसक्तिरहित कर्मों से सिद्धि पाई है,
इसी तरह लोकसंग्रह को देखकर भी,
तेरा कर्म करना हि उचित प्राय है. अ. 3 श्ल. 20


आगे -


यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः.
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 21

Monday, July 6, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


इसलिए तू सदैव,
आसक्तिरहित होकर,
भलीभांति कार्य कर,
इसी तरह कार्य कर,
तू पा जाएगा,
परमात्मा इस डगर. अ. 3 श्ल. 19


आगे -


कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयह.
लोकसंग्रहमेवापि सम्पशयांकर्तुंमर्हसि..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 20

Sunday, July 5, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


उस महापुरुष का कोई प्रयोजन न विश्व में,
चाहे कुछ करे न करे,
इसी तरह उसका कोई स्वार्थ नहीं जगत में,
चाहे जहाँ भी रहे. अ. 3 श्लो. 18


आगे -


तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर् .
असक्तो ह्याचरन्कर्म प्रमाप्नोति पुरुषः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 19

Saturday, July 4, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


जो आत्मा में रमण करे,
आत्मा में ही तृप्त यहीं,
आत्मा में संतुष्ट रहे,
उसके कोई कर्तव्य नहीं.अ.3 श्ल. 17


आगे -


नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन.
न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयह..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 18

Friday, July 3, 2009

जय श्री कृष्ण



जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -

हे पार्थ ! जो लोक में ऐसा न करे,
परम्परा से प्रचलित सृष्टिचक्र के अनुसार,
कर्तव्य का पालन न करे,
वह इंद्रियों के द्वारा भोगों में,
रमण करने वाले पापायु पुरुष ,
व्यर्थ जिए और व्यर्थ मरे.अ. 3 श्ल. 16

आगे -

यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः.
आत्मन्येव च संतुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 17

Thursday, July 2, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


कर्म वेद से,
वेद ब्रह्मा से, ब्रह्मा अक्षर से,
तो ब्रह्मा रचयिता सदैव,
रहें हर यज्ञ से. अ. 3 श्ल. 15


आगे -


एवं प्रवर्तितम् चक्रम नानुवर्तयतीह यह.
अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 16

Wednesday, July 1, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


सब बढ़ें अन्न से,
अन्न बने बरखा से,
बरखा यज्ञ से,
और यज्ञ कर्मों से. अ. 3 श्ल. 14


आगे -


कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्धभवं.
तस्मात्सर्वगतम् ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम्..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 15