Monday, September 28, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


पहले भी जो राग, भय, क्रोध से मुक्त हो गए,
और मुझमें प्रेमपूर्वक स्थित हो गए,
ऐसे मेरे आश्रित और उपर ज्ञान तप से शुद्ध हुए,
सब लोग मेरे स्वरूप को प्राप्त हो गए. अ. 4 श्ल. 10


आगे -


ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम.
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 11

Sunday, September 20, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म दिव्य हैं ,
इस तरह जो तत्वतः जान जाए,
वह शरीर को त्याग कर मुझे पा जाए,
बार बार जन्म मरण से मुक्त हो जाए. अ. 4 श्ल. 9


आगे -


वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिता:.
बहवो ज्ञान तपसा पूता मद्भावमागताः ..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 10.

Saturday, September 12, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


साधु का उद्दार, पापी का नाश,
तथा धर्म को पुनः स्थापित करने,
हर युग में प्रकट होता हूँ,
हर कल का सुधार करने. अ. 4 श्ल. 8


आगे -


जन्म कर्म च मे दिव्यमेवम् यो वेत्ति तत्त्वतः.
त्यक्त्वा देहँ पुनर्जन्म नैति मामेति सो$र्जुन..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 9

Friday, September 4, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


सुन ले मेरे भारत ! जब जब भी इस धरती पर,
धर्म की हानि और अधर्म की वृध्दि होती है,
तब तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ इस पृथ्वी पर,
अर्थात साकार रूप में लोगों के सम्मुख मेरी उत्पत्ति होती है. अ. 4 श्ल. 7


आगे -


परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम्.
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 8