
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
यज्ञ से बचे अन्न को खाने वाले श्रेष्ठ,
सब पापों से मुक्त हो जाते,
परंतु जो मात्र अपने पोषण को पकाते,
वे तो बस पाप ही खाते. अ. 3 श्ल. 13
आगे -
अन्नद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवह.
यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 14





























