
ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -
काल शुरू में यज्ञ और,
प्रजा को रचकर ब्रह्माजी तब बोले,
तुम सब ये यज्ञ करो और,
वृद्धि पाओ ये किस्मत द्वार सब खोले,
ये यज्ञ तुम्हें सब दे और,
दे इच्छित भोगों के भर भर झोले. अ. 3 श्ल. 10
आगे -
देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः.
परस्परम् भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 11

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