Tuesday, June 16, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


जैसे नाना नदियों के जल,
एक समुन्द्र में समा जाते,
वैसे भोग अनेक मिलकर भी,
स्थितप्रज्ञ को नहीं हिला पाते,
सब और भरे अचल प्रतिष्ठित,
समुन्द्र नहीं विचलित होते,
ऐसे स्थिर पुरुष भोगों में,
परम शांत को ही पाते. अ. 2 श्ल. 70


आगे


विहाय कामान्यः सर्वान्पुमान्श्चरति निःस्पृहः.
निर्ममो निरहन्कारः स शान्तिमधिगच्छति..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 71

No comments:

Post a Comment