
ॐ
जय श्री कृष्ण हिन्दी अनुवाद -
हे पार्थ ! ब्रह्म को प्राप्त योगी की स्थिति है ये,
जिसे पाकर कभी मोहित नहीं होता योगी,
अंतकाल में भी इसमें स्थित होकर,
ब्राह्मानन्द को पा जाता है योगी. आ. 2 श्ल. 72
आगे -
अथ तृतीयो अध्यायः
ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन.
तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 1

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