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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री क्रिष्णहिन्दी अनुवाद - मानव कर्मों को छोड़,न बनें कर्मयोगी,न सब त्याग कर,बने ज्ञानयोगी. अ. 3. श्ल. 4आगे - न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत.कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 5
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