
ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -
यज्ञ द्वारा बढ़ाए तुम्हारे ये देवता,
तुम्हें बिन मांगे इच्छित भोग देंगे,
परंतु जो देवताओं को कुच्छ नहीं चढ़ाता,
स्वयं भोगता है वह निश्चय चोर ही होंगे.अ.3 श्ल. 12
आगे -
यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिशैः.
भुंजंते ते त्वघं पापा ये पचान्त्यात्मकारणात..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 13

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