
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
यज्ञ के निमित्त न कर,
अन्यत्र कर्मों में बंधे इंसान,
कौन्तेय आसक्तिरहित होकर ,
तू ये अपना परमधर्म मान,
कि विष्णु या यज्ञ के निमित्त ही,
भक्तिसहित कर्म् करना पहचान. अ. 3 श्ल. 9
आगे -
सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः.
अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोस्त्विष्टकामधुक..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 10
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
यज्ञ के निमित्त न कर,
अन्यत्र कर्मों में बंधे इंसान,
कौन्तेय आसक्तिरहित होकर ,
तू ये अपना परमधर्म मान,
कि विष्णु या यज्ञ के निमित्त ही,
भक्तिसहित कर्म् करना पहचान. अ. 3 श्ल. 9
आगे -
सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः.
अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोस्त्विष्टकामधुक..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 10

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