Monday, June 22, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


सत तो ये है की कोई,
न रह सके बिना कर्मों के कभी ,
क्यों की कर्म करें अवश्,
प्रकृति के अधीन होके सभी. अ. 3 श्ल. 5


आगे -


कर्मेन्द्रियाणी संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन.
इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 6

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