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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद - सत तो ये है की कोई,न रह सके बिना कर्मों के कभी ,क्यों की कर्म करें अवश्,प्रकृति के अधीन होके सभी. अ. 3 श्ल. 5आगे - कर्मेन्द्रियाणी संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन.इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 6
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