Friday, October 30, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


पूर्व में भी इसी तरह,
मुमुक्षुयों ने कर्म किए,
इसे जान कर,
करो कर्म तुम भी,
पूर्व की तरह,
इसे पहचान कर. अ. 4 श्ल. 15


आगे -


किं कर्म किमकर्मेति क़वयो$प्यत्र मोहिता:.
तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसे$शुभात..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 16

Friday, October 23, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -
कर्म मुझे लिप्त नहीं करते,
न कर्मफल में मेरी स्पृहा,
इस तरह जो जाने मुझे,
वो कर्मों से मुक्त रहा. अ. 4 श्ल. 14

आगे -

एवं ज्ञात्वा कृतम् कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः.
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वम् पूर्वैः पूर्वतरं कृतम्..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 15

Saturday, October 17, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र,
ये सब समूह सब प्रकार हि मैं रचता,
यूँ सब प्रकार सृष्टि, रचनादि कर्म का कर्ता भी,
मैं अविनाशी परमात्मा रहता अकर्ता. अ.4 श्ल.13


आगे -


न मां कर्मानि लिंपन्ति न मे कर्मफले स्पृहा.
इति मां यो$भिजानाति कर्मभीर्न स बध्यते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 14

Saturday, October 10, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -


जो फल को चाहें लोक में,
भजते अन्य देवता,
इससे उनके कर्मों का फल,
शीग्र देवें देवता. अ. 4 श्ल. 12


आगे -


चातुर्वर्ण्यम् मया सृष्टं गुणकर्मविभागश:.
तस्य कर्तारमपी मां विद्धयकर्तारमव्ययम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 13

Friday, October 2, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हे अर्जुन ! जो मुझे जैसा भजता है,
वैसा ही मैं उसे भजता हूँ,
क्योंकि सभी मनुष्य, सब प्रकार मेरा ही अनुसरण करते हैं.
यही मैं भी करता हूँ. अ. 4 श्ल. 11


आगे -


कांक्षन्तः कर्मणाः सिद्धिं यजन्तः इह देवताः.
क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 12