ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -
जल में जैसे नाव को,
तेज हवा भटकाय,
वैसे ही भटकते मन की दशा,
देख कृष्ण बतलाए ..
विषयों में विचरती इंद्रियों में,
मन जिसके साथ लग जाय,
बस एक इंद्रिय प्रयत्न करते अयुक्त की,
बुद्धि हर ले जाय . अ. 2 श्ल. 67
आगे -
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः.
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 68

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