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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवादअंतःकरण की प्रसन्नता पाकर,दुःख सारे दूर दूर भागें,प्रसन्न कर्मयोगी सबसे ध्यान हटाकर,तब परमात्मा में ही लागे. अ. 2 श्ल. 65आगेनास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना.न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखं..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 66
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