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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवादआसक्ति का नाश न हो तो,उद्यत करने वाली इन्द्रियाँ,यत्न करते पुरुष की भी,बुद्धि हर लें ये बिजलियाँ. अ.2 श्ल. 60आगेतानि सर्वानि संयम्य युक्त आसीत् मत्परः.वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 61.
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