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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवादजैसे कछुवा समेटे अंगों को,ऐसे समेट इन्द्रियाँ जतन से,अपने विषयों से और इस मन से,स्थिर होगी तब बुद्धि लगन से. अ. 2 श्ल. 58आगेविषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः.रसवर्जं रसोप्यस्य परम दृष्ट्वा निवर्तते..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 59
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