Wednesday, June 3, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


जैसे कछुवा समेटे अंगों को,
ऐसे समेट इन्द्रियाँ जतन से,
अपने विषयों से और इस मन से,
स्थिर होगी तब बुद्धि लगन से. अ. 2 श्ल. 58


आगे


विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः.
रसवर्जं रसोप्यस्य परम दृष्ट्वा निवर्तते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 59

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