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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाददुःख से जिसे उद्वेग न हो,सुख से भी निःस्पृह है जो,राग, भय, क्रोध नहीं,मुनि एक स्थिरबुद्धि वही. अ. 2 श्ल. 56आगे
य: सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् .नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 57
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