Monday, June 1, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


दुःख से जिसे उद्वेग न हो,
सुख से भी निःस्पृह है जो,
राग, भय, क्रोध नहीं,
मुनि एक स्थिरबुद्धि वही. अ. 2 श्ल. 56


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य: सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् .
नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 57

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