Tuesday, June 2, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


जो बुद्धि सर्वत्र स्नेह्रहित है,
शुभ अशुभ में सम रहती है,
न प्रसन्न न द्वेष करती है,
वही बुद्धि स्थिर रहती है. अ. 2 श्ल. 57


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यदा संहरते चायं कुर्मोअन्गनीव सर्वशः.
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 58

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