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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवादजो बुद्धि सर्वत्र स्नेह्रहित है,शुभ अशुभ में सम रहती है,न प्रसन्न न द्वेष करती है,वही बुद्धि स्थिर रहती है. अ. 2 श्ल. 57आगे
यदा संहरते चायं कुर्मोअन्गनीव सर्वशः.इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 58
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