Sunday, June 7, 2009

जय श्री कृष्ण


ॐ
जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


विषयों में विचरते,
की होवे उनमें सक्ति,
ध्यान करते करते,
हो जाए आसक्ति,
इससे उपजे कामना,
पाने की हर युक्ति,
जो न पूरी होने से,
निश्चित क्रोध उत्पत्ति. अ. 2 श्ल. 62


आगे


क्रोधाद्भवति समोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः.
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशत्प्रनश्यति..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 63

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