
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद
इंद्रिय विषय को ग्रहण न करने वाले के,
विषय तो निवृत हो जाते हैं परंतु,
उनमें रहने वाली आसक्ति नहीं मिटती,
परंतु इस स्थितप्रज्ञ पुरुष की आसक्ति भी,
परमात्मा का साक्षात्कार करके नहीं टिकती. अ. 2 श्ल. 59
आगे
यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः.
इन्द्रियानि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभम् मनः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 60

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