Sunday, May 31, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी आनुवाद


श्री भगवान बोले अर्जुन मनुष्य जिस काल में,
मन की स्मस्त कामनाओं को त्यागे,
और आत्मा से ही आत्मा में संतुष्ट रहे,
उसी काल में वह स्थितप्रज्ञ कहलाए. अ. 2 श्ल. 55


आगे -


दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः.
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीरमुनिरुच्यते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 56

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