
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद
हे धनंजय ! छोड़ आसक्ति,
सिद्धि असिद्धि में रह सम,
योगयुक्त कर तेरी कृति,
समत्व योग करले हरदम, अ. 2 श्ल. 48
आगे
दूरेण ह्यावरम् कर्म बुद्धियोगाद्धनन्ज्य.
बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 49

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