Friday, May 29, 2009

जय श्री कृष्ण



जय श्री कृष्ण

याद है मुझे कितना,
अभिमान रहता है,


कितना ज्ञान,
कितने लफ्ज़,
कितना अभ्यास,
अहसास रहता है,


समझ पाए कोई,
किसमें हिम्मत,
नाज़ रहता है,


फिर तंग आ गया मैं,
ज्ञान के विस्तार से,
वही सुंदर बाला,
एक राक्षस बन गया,
किसे अंदाज रहता है,


सम्हाले नहीं सम्हलता,
कौन ध्यान देगा,
कौन निकालेगा,
इस दलदल से,
किसे आगाज़ रहता है,


मेरा बालक भी नहीं दिखता,
रास्ता दिखा दे,
जो इस जमघट से,
किसे याद रहता है,


तब आया वो स्लोना,
खींच ले गया,
दूर गगन की छाँव में,
बस यही सम्हाल रखता है,


तब समझा मैं,
यदि रखता ध्यान,
उस बालक का,
तो आज ये दिन न आता,
अब ये ख्याल रहता है,


याद रख,
और वापस आना,
आशीर्वाद लेने,
फिर ना कहना,
कहा नहीं,
इस युद्ध का क्या अंदाज रहता है.

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