Friday, May 8, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद


कर्म योग में आरम्भ या बीज का नाश नहीं होता,
न फल का दोष इसमें,
और थोड़ा सा साधन भी मुक्त है करता,
जन्म मृत्यु जैसे महान भयों से. अ. 2 श्ल. 40


आगे


व्यवसायात्मिका बुद्धरेकेह कुरुनन्दन.
बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोअव्यसयिनाम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 41

No comments:

Post a Comment