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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवादकर्म योग में आरम्भ या बीज का नाश नहीं होता, न फल का दोष इसमें, और थोड़ा सा साधन भी मुक्त है करता, जन्म मृत्यु जैसे महान भयों से. अ. 2 श्ल. 40 आगे व्यवसायात्मिका बुद्धरेकेह कुरुनन्दन. बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोअव्यसयिनाम.. श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 41
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