
ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद
अर्जुन ! वेद तीन गुणों के राही,
तू तीनों से आगे बढ़ जा,
द्वन्द्व छोड़ सुख दुख सा,
उनसे भी आगे बढ़ जा,
जोड़ स्महाल छोड़ उस पर,
आत्मराह पर तू बढ़ जा,
नित्य सत्य परमात्मा में जी ले,
स्वाधीन अन्तरवाला बन जा, अ. 2 श्ल. 45
आगे
यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोद्के.
तावान सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 46

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