Wednesday, May 20, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


भोग और आसक्ति से हरे,
वे लोग क्या माने,
निश्चय स्थिर बुद्धि धर्म,
उस परमात्मा में क्या जाने. अ. 2 श्ल. 44


आगे


त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन.
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 45

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