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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवादभोग और आसक्ति से हरे,वे लोग क्या माने,निश्चय स्थिर बुद्धि धर्म,उस परमात्मा में क्या जाने. अ. 2 श्ल. 44आगेत्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन.निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 45
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