
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद
हे कुरुनन्दन ! निश्चय बुद्धि एक इस मार्ग में चलते दृढ़ की,
इस कर्मयोग में,
पर अस्थिर, अविवेकी, सकाम पुरुष की,
अनंत व भेद वाली बुद्धि इसी कर्मयोग में. अ.2.श्ल. 41
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यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितह.
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः..
कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्.
क्रियाविशेषबहुलाम् भोगैश्वर्यगतिं प्रति..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 42-43

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