Monday, May 18, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद
हे कुरुनन्दन ! निश्चय बुद्धि एक इस मार्ग में चलते दृढ़ की,
इस कर्मयोग में,
पर अस्थिर, अविवेकी, सकाम पुरुष की,
अनंत व भेद वाली बुद्धि इसी कर्मयोग में. अ.2.श्ल. 41

आगे

यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितह.
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः..
कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्.
क्रियाविशेषबहुलाम् भोगैश्वर्यगतिं प्रति..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 42-43

No comments:

Post a Comment