ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -
पहले भी जो राग, भय, क्रोध से मुक्त हो गए,
और मुझमें प्रेमपूर्वक स्थित हो गए,
ऐसे मेरे आश्रित और उपर ज्ञान तप से शुद्ध हुए,
सब लोग मेरे स्वरूप को प्राप्त हो गए. अ. 4 श्ल. 10
आगे -
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम.
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 11

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