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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद - जो आत्मा में रमण करे,आत्मा में ही तृप्त यहीं,आत्मा में संतुष्ट रहे,उसके कोई कर्तव्य नहीं.अ.3 श्ल. 17आगे - नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन.न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयह..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 18
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