Saturday, July 4, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


जो आत्मा में रमण करे,
आत्मा में ही तृप्त यहीं,
आत्मा में संतुष्ट रहे,
उसके कोई कर्तव्य नहीं.अ.3 श्ल. 17


आगे -


नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन.
न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयह..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 18

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