Tuesday, July 7, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


जनकादि ज्ञानीजन राजाओं ने भी,
आसक्तिरहित कर्मों से सिद्धि पाई है,
इसी तरह लोकसंग्रह को देखकर भी,
तेरा कर्म करना हि उचित प्राय है. अ. 3 श्ल. 20


आगे -


यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः.
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 21

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