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जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद - जनकादि ज्ञानीजन राजाओं ने भी,आसक्तिरहित कर्मों से सिद्धि पाई है,इसी तरह लोकसंग्रह को देखकर भी,तेरा कर्म करना हि उचित प्राय है. अ. 3 श्ल. 20आगे -यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः.स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 21
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