ॐजय श्री कृष्ण
स्थूल शरीर से परे ये इन्द्रियाँ मान,
अर्थात श्रेष्ठ, बलवान, व सूक्ष्म ये जान,
ऐसे ही इंद्रियों से परे ये मन है मान,
मन से परे ये बुद्धि तू जान,
और बुद्धि से भी जो अतयंत परे है,
वो है ये सर्व व्यापी आत्मा ये जान. अ. 3 श्ल. 42
आगे -
एवं बुद्धेः परम् बुद्ध्वा सनस्तभयात्मानमात्मना.
जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दूरासदम्..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 43

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