ॐ
जय श्री कृष्ण हिन्दी अनुवाद -
परमात्मा में स्थित ज्ञानी जन,
शास्त्रविहित कर्मों में आसक्ति वाले,
अज्ञानी जनों की बुद्धि में सुन,
भ्रम या अश्रद्धा न उत्पन्न करे,
स्वयं शास्त्रविहित कर्म करे,
व उनसे भी वैसे हो प्रयत्न करे. आ. 3 श्ल. 26
आगे -
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्मानि सर्वशः.
अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 27

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