skip to main |
skip to sidebar
जय श्री कृष्ण

ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद - हे पार्थ ! इन तीनों लोकों में,मुझे कोई कर्म नहीं,न ही प्राप्ति योग्य अप्राप्य जग में,तो भी न रहूँ बिना कर्म कहीं.अ. 3 श्ल. 22आगे - यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतंद्रितः.मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 23
No comments:
Post a Comment