Thursday, July 9, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


हे पार्थ ! इन तीनों लोकों में,
मुझे कोई कर्म नहीं,
न ही प्राप्ति योग्य अप्राप्य जग में,
तो भी न रहूँ बिना कर्म कहीं.अ. 3 श्ल. 22


आगे -


यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतंद्रितः.
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 23

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