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जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्णप्रकृति गुणों से मोहित रहने वाले,गुणों और कर्मों में आसक्त रहें,उन न समझने वालों को जानने वाले,ज्ञानीजन विचलित होने न कहेँ. अ. 3 श्ल. 29आगे -मयि सर्वाणी कर्मानी सन्न्यस्याध्यात्मचेतसा.निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 30
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