Thursday, July 16, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


प्रकृति गुणों से मोहित रहने वाले,
गुणों और कर्मों में आसक्त रहें,
उन न समझने वालों को जानने वाले,
ज्ञानीजन विचलित होने न कहेँ. अ. 3 श्ल. 29


आगे -


मयि सर्वाणी कर्मानी सन्न्यस्याध्यात्मचेतसा.
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 30

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