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जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्णसत्त तो ये जान कि संपूर्ण कार्य प्रकृति के,गुणों द्वारा पूर्णतया किए जाएँ,परंतु अहंकार अंतःकरण में जिनके,अज्ञानीजन मैं कर्ता हूँ यूँ मानते आएं. अ. 3 श्ल. 27आगे - तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयो:.गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 28
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