Tuesday, July 14, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


सत्त तो ये जान कि संपूर्ण कार्य प्रकृति के,
गुणों द्वारा पूर्णतया किए जाएँ,
परंतु अहंकार अंतःकरण में जिनके,
अज्ञानीजन मैं कर्ता हूँ यूँ मानते आएं. अ. 3 श्ल. 27


आगे -


तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयो:.
गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 28

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