Friday, July 3, 2009

जय श्री कृष्ण



जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -

हे पार्थ ! जो लोक में ऐसा न करे,
परम्परा से प्रचलित सृष्टिचक्र के अनुसार,
कर्तव्य का पालन न करे,
वह इंद्रियों के द्वारा भोगों में,
रमण करने वाले पापायु पुरुष ,
व्यर्थ जिए और व्यर्थ मरे.अ. 3 श्ल. 16

आगे -

यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः.
आत्मन्येव च संतुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 17

No comments:

Post a Comment