
ॐ
जय श्री कृष्ण
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
हे पार्थ ! जो लोक में ऐसा न करे,
परम्परा से प्रचलित सृष्टिचक्र के अनुसार,
कर्तव्य का पालन न करे,
वह इंद्रियों के द्वारा भोगों में,
रमण करने वाले पापायु पुरुष ,
व्यर्थ जिए और व्यर्थ मरे.अ. 3 श्ल. 16
आगे -
यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः.
आत्मन्येव च संतुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 17
हे पार्थ ! जो लोक में ऐसा न करे,
परम्परा से प्रचलित सृष्टिचक्र के अनुसार,
कर्तव्य का पालन न करे,
वह इंद्रियों के द्वारा भोगों में,
रमण करने वाले पापायु पुरुष ,
व्यर्थ जिए और व्यर्थ मरे.अ. 3 श्ल. 16
आगे -
यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः.
आत्मन्येव च संतुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 17

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