ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -
इंद्रिय-इन्द्रियके विषय में,
राग द्वेष छिपे स्थित रहें,
मनुष्य को चाहिए,
इनके वश में न बहें,
क्योंकि यही उसके मार्ग में,
महान शत्रु बने रहें. अ. 3 श्ल. 34
आगे -
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात.
स्वधर्मे निधनम श्रेयः परधर्मो भयावहः..
श्रीमदभगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 35

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