Tuesday, July 21, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


इंद्रिय-इन्द्रियके विषय में,
राग द्वेष छिपे स्थित रहें,
मनुष्य को चाहिए,
इनके वश में न बहें,
क्योंकि यही उसके मार्ग में,
महान शत्रु बने रहें. अ. 3 श्ल. 34


आगे -


श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात.
स्वधर्मे निधनम श्रेयः परधर्मो भयावहः..


श्रीमदभगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 35

No comments:

Post a Comment