Sunday, July 26, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


दुनियाँ में इस काम की,
कभी न बुझती प्यास,
ज्ञानी के नित्य वैरी से,
छिपी ज्ञान की आस. अ.3 श्ल. 39


आगे -


इन्द्रियानि मनो बुद्धीरसयाधिष्ठानामुच्यते.
एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 40

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