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जय श्री कृष्ण
ॐजय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद - दुनियाँ में इस काम की,कभी न बुझती प्यास,ज्ञानी के नित्य वैरी से, छिपी ज्ञान की आस. अ.3 श्ल. 39आगे -इन्द्रियानि मनो बुद्धीरसयाधिष्ठानामुच्यते.एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 40
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