Sunday, December 6, 2009

जय श्री कृष्ण



जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

अंदर बाहर वश में जिसके,
इन्द्रियाँ भी हैं जीती जिसने,
भोगों को त्याग दिया है जिसने,
आशा रहित ऐसा व्यक्ति,
शरीर निर्वाह कर्म करते भी,
नहीं पाप का भागी जगमें.

आगे -

यदृच्छालाभसंतुष्टो द्वंद्वातीतो विमत्सरः.
समः सिद्धावसिद्धौ च कृतवापि न निबध्यते..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 22

1 comment:

  1. hello... hapi blogging... have a nice day! just visiting here....

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