Saturday, November 7, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


कर्म और अकर्म क्या हैं?
बुद्धिमान भी मोहित हो जाएँ,
इसीसे कहूँगा इसका भेद,
जिसे जान बंधन मुक्त हो पाएँ. अ.4 श्ल.16


आगे -


कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः.
अकर्मनश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 17

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