Sunday, November 15, 2009

जय श्री कृष्ण



जय श्री कृष्ण


अनुवाद -

मनुष्य जो कर्म में अकर्म, अकर्म में कर्म देखे,
वही मनुष्यों में बुद्धिमान है,
वही योगी समस्त कर्मों का करने वाला है,
वही सज्ञान है. आ.4 श्ल. 18


आगे -


यस्य सर्वे समारंभाः कामसंकल्पवर्जिताः.
ज्ञानागनिदग्ध्कर्मणम तमाहुः पंडितम् बुधाः..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 19

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