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जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद - मैं अजन्मा, अविनाशी, सब का ईश्वर होकर भी,कर सकता हूँ स्वप्रकृति अधीन,और अपनी योग माया से,हो सकता हूँ प्रकट चाहे जहाँ कहीं. अ. 4 श्ल. 6आगे -यदा यदा ही धर्मस्य ग्लनिर्भवति भारत.अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहम..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 7
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