Friday, August 28, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद -


मैं अजन्मा, अविनाशी, सब का ईश्वर होकर भी,
कर सकता हूँ स्वप्रकृति अधीन,
और अपनी योग माया से,
हो सकता हूँ प्रकट चाहे जहाँ कहीं. अ. 4 श्ल. 6


आगे -


यदा यदा ही धर्मस्य ग्लनिर्भवति भारत.
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 7

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