ॐजय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
इस प्रकार हे परन्तप ! परम्परा से,
प्राप्त इस योग को राजर्षियोँ ने जाना,
किन्तु इसके उपरांत बहुत काल से,
ये योग पृथ्वी लोक से रहा लुप्तप्राय व अनजाना. अ. 4 श्ल. 2
आगे -
स एवायं मया तेअद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः.
भक्तोअसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 3

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