Sunday, May 31, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी आनुवाद


श्री भगवान बोले अर्जुन मनुष्य जिस काल में,
मन की स्मस्त कामनाओं को त्यागे,
और आत्मा से ही आत्मा में संतुष्ट रहे,
उसी काल में वह स्थितप्रज्ञ कहलाए. अ. 2 श्ल. 55


आगे -


दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः.
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीरमुनिरुच्यते..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 56

Saturday, May 30, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

अर्जुन ने पूछा - हे केसी दैत्य के हंता,
समाधि में स्थित पुरुष के क्या लक्षण हैं ?
कैसे बोलता है, कैसे है चलता ?
हमें बताइए इनमें क्या विलक्षण है ? अ. 2 श्ल. 54

आगे

श्रीभगवानुवाच -
प्रजहाती यदा कामान सर्वान पार्थ मनोगतान.
आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञास्तदोच्यते..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 55

Friday, May 29, 2009

जय श्री कृष्ण



जय श्री कृष्ण

याद है मुझे कितना,
अभिमान रहता है,


कितना ज्ञान,
कितने लफ्ज़,
कितना अभ्यास,
अहसास रहता है,


समझ पाए कोई,
किसमें हिम्मत,
नाज़ रहता है,


फिर तंग आ गया मैं,
ज्ञान के विस्तार से,
वही सुंदर बाला,
एक राक्षस बन गया,
किसे अंदाज रहता है,


सम्हाले नहीं सम्हलता,
कौन ध्यान देगा,
कौन निकालेगा,
इस दलदल से,
किसे आगाज़ रहता है,


मेरा बालक भी नहीं दिखता,
रास्ता दिखा दे,
जो इस जमघट से,
किसे याद रहता है,


तब आया वो स्लोना,
खींच ले गया,
दूर गगन की छाँव में,
बस यही सम्हाल रखता है,


तब समझा मैं,
यदि रखता ध्यान,
उस बालक का,
तो आज ये दिन न आता,
अब ये ख्याल रहता है,


याद रख,
और वापस आना,
आशीर्वाद लेने,
फिर ना कहना,
कहा नहीं,
इस युद्ध का क्या अंदाज रहता है.

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


भिन्न श्रुतियों से भ्रांत, जब बाहर आएगी,
तेरी बुद्दि जब ईश्वर में स्थिर हो जाएगी,
तभी इस योग में अचल व रब्ब में नित्य रह पाएगी. अ. 2 श्ल. 53


आगे


अर्जुन उवाच
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव.
स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 54

Thursday, May 28, 2009

जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


जिस काल तेरी बुद्धि,
मोह रूप दलदल तर जाएगी,
तब उस सुने और सुनाए,
वैराग्य को पा जाएगी. अ. 2 श्ल. 52


आगे -


श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला.
समाधावचला बुद्धिस्तदा योगामवाप्स्यसि..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 53

Wednesday, May 27, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


समत्वबुद्धि से युक्त हो ज्ञानी,
कर्मफल त्याग कर पाएँ,
बन्धनमुक्त होकर फिर वे,
अचल परमपद पा जावें. अ. 2 श्ल. 51


आगे


यदा ते मोहकलिलम् बुद्धिर्व्यतितरिश्यति.
तदा गन्तासी निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 52

Tuesday, May 26, 2009

जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण


हिन्दी अनुवाद


समबुद्धि योगी त्यागे,पाप और पुण्य,इसी लोक में,
तो लग जा इसमें,यही कर्म कुशलता, और मुक्ति इसमें. अ. 2 श्ल. 50


आगे


कर्मजं बुद्दियुक्ता हि फलम त्यक्त्वा मनीषिणः.
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्..


श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 51