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जय श्री कृष्ण
Friday, November 27, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्ण
अनुवाद -
व्यक्ति जो कर्मों और उनके फलों में आसक्ति से,
संसारी आसरे से रहित रहे,
परमात्मा में तृप्त हुआ सर्व कर्मों को करते भी,
कुच्छ नहीं करे. अ. 4 श्ल. 20
आगे -
निराशीर्यतचित्तात्मा त्यॅक्तसर्वपारिग्रहः.
शारीरम् केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 21.
Saturday, November 21, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
संपूर्ण कर्म जिसके,कामसंकल्प रहित जाने,
ज्ञानाग्नि में भस्म,ज्ञानी भी उसे पंडित माने. अ. 4 श्ल.19
आगे -
त्यक्त्वा कर्मफलासंगम नित्यत्रुप्तो निराश्रयः.
कर्मन्यभिप्रव्रुतो$पि नैव किन्चित्करोति सः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 20
Sunday, November 15, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्ण
अनुवाद -
मनुष्य जो कर्म में अकर्म, अकर्म में कर्म देखे,
वही मनुष्यों में बुद्धिमान है,
वही योगी समस्त कर्मों का करने वाला है,
वही सज्ञान है. आ.4 श्ल. 18
आगे -
यस्य सर्वे समारंभाः कामसंकल्पवर्जिताः.
ज्ञानागनिदग्ध्कर्मणम तमाहुः पंडितम् बुधाः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 19
Friday, November 13, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्ण
अनुवाद -
कर्म का स्वरूप भी जानो,
अकर्म का भी,
और विकर्म का भी जानो,
गहन कर्म की गति तभी. अ.4 श्ल. 17
आगे -
कर्मन्यकर्म य: पश्येद्कर्मनि च कर्म य:.
स बुद्धिमांमनुष्येषु स युक्त कृतसनकर्मकृत.
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 18
Saturday, November 7, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
कर्म और अकर्म क्या हैं?
बुद्धिमान भी मोहित हो जाएँ,
इसीसे कहूँगा इसका भेद,
जिसे जान बंधन मुक्त हो पाएँ. अ.4 श्ल.16
आगे -
कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः.
अकर्मनश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 17
Friday, October 30, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
पूर्व में भी इसी तरह,
मुमुक्षुयों ने कर्म किए,
इसे जान कर,
करो कर्म तुम भी,
पूर्व की तरह,
इसे पहचान कर. अ. 4 श्ल. 15
आगे -
किं कर्म किमकर्मेति क़वयो$प्यत्र मोहिता:.
तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसे$शुभात..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 16
Friday, October 23, 2009
जय श्री कृष्ण
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
कर्म मुझे लिप्त नहीं करते,
न कर्मफल में मेरी स्पृहा,
इस तरह जो जाने मुझे,
वो कर्मों से मुक्त रहा. अ. 4 श्ल. 14
आगे -
एवं ज्ञात्वा कृतम् कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः.
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वम् पूर्वैः पूर्वतरं कृतम्..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 15
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