Tuesday, December 29, 2015
Saturday, April 3, 2010
जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण
कई पुरुष द्रव्यसंबंधी यज्ञ करें,
कितने तपस्या रूप यज्ञ करें,
कई योग रूप यज्ञ करते,
कितने अहिंसादि तीक्ष्ण व्रतों
से युक्त यत्नशील पुरुष,
स्वाध्याय रूप ज्ञान यज्ञ करते हैं. अ 4 श्ल 28
और भी -
अपाने जुव्हति प्राणं प्राणेपानं तथापरे.
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 29
Friday, February 12, 2010
Saturday, February 6, 2010
जय श्री कृष्ण
जय श्री कृष्णहिन्दी अर्थ -
दूसरे कई योगीजन,
देवता पूजन यज्ञ का,
भलीभांति अनुष्ठान करते हैं,
और कई परब्रह्म परमात्मा,
रूप अग्नि में अभेददर्शन रूप,
यज्ञ के द्वारा आत्मरूप यज्ञ,
का हवन करते हैं. अ. 4 श्ल. 25
और -
श्रोत्रादिनीन्द्रियन्ये संयामागनीषु जुव्हती.
शब्दादिन्विश्यान्य इन्द्रियाग्निशु जुव्हती..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 26
Saturday, January 23, 2010
जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद -
जिस यज्ञ में अर्पण ब्रह्म है,
हवन किया द्रव्य ब्रह्म है,
और ब्रह्म कर्ता द्वारा,
ब्रह्म रूप अग्नि में,
आहुति भी ब्रह्म है,
उस ब्रह्म कर्म में,
प्राप्त फल भी ब्रह्म है. अ.4 श्ल. 24
और -
दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते.
ब्रह्मग्नावपरे यज्ञं यग्नेनैवोपजुव्हति..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 25
Sunday, January 17, 2010
जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्ण
हिन्दी अर्थ -
जिसकी आसक्ति नष्ट हुई है,
जिसमें देहाभिमान नहीं,
जो ममता से रहित है,
जो सदैव परमात्मा में स्थित है,
ऐसा यज्ञ संपादन हेतु कर्मी के,
सारे कर्म विलीन हो जाते हैं. स.4 श्ल. 23
और -
ब्रह्मार्पणम ब्रह्म हविर्ब्रह्मग्नौ ब्रह्मणा हुतम्.
ब्रह्म्नैव तेन गंतव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 24
हिन्दी अर्थ -
जिसकी आसक्ति नष्ट हुई है,
जिसमें देहाभिमान नहीं,
जो ममता से रहित है,
जो सदैव परमात्मा में स्थित है,
ऐसा यज्ञ संपादन हेतु कर्मी के,
सारे कर्म विलीन हो जाते हैं. स.4 श्ल. 23
और -
ब्रह्मार्पणम ब्रह्म हविर्ब्रह्मग्नौ ब्रह्मणा हुतम्.
ब्रह्म्नैव तेन गंतव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 24
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