Friday, February 12, 2010

जय श्री कृष्ण




जय श्री कृष्ण

अन्य योगी सन्यमाग्नि में,
श्रोत्रादि समस्त इंद्रियों को हवन करते हैं,
दूसरे कई योगी शब्दादि समस्त विषयों को,
इंद्रिय रूप अग्नि में हवन करते हैं. अ.4 श्ल. 26

और -

सर्वानीन्द्रीयकर्मानी प्राणकर्मानी चापरे.
आत्मसंयमयोगागनौ जुह्वति ज्ञानदीपिते..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 27

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