
ॐ
जय श्री कृष्ण
हिन्दी अनुवाद
हे पार्थ ! भाग्यवान क्षत्रिय ही,
पावें ऐसा युद्ध,
स्वर्ग द्वार खुला मिला,
हुआ कर्म अदबुद्ध. अ. 2 श्ल. 32
आगे
अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यम संग्राम न करिष्यसि.
ततः स्वधर्म कीर्ति च हित्वा पापमवाप्स्यसि.
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 33
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